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वीडियो : सलमान खान की शादी हो या ना हो लेकिन राहुल गांधी ने अपनी शादी को लेकर खोला राज

कांग्रेस के युवा उपाध्यक्ष 47 वर्षीय राहुल गांधी की शादी को लेकर लोग अक्सर उनका मजाक उड़ाते हैं. कभी राहुल गांधी ने इसपर खुलकर अपनी बात भी नही रखी हैं. राहुल अक्सर कुछ महीनों के अंतराल पर विदेश में छुट्टियां मनाने भी जाते हैं. पार्टी की तरफ से कहा जाता है कि वो चिंतन करने के लिए जाते हैं हालाँकि विपक्ष इसे लेकर उन्हें घेरने की कोशिश में लगा रहता हैं. गुजरात चुनाव के बीच देश के बड़े खिलाड़ी ने राहुल गांधी से शादी को लेकर सवाल पूछ लिया जिसके बाद राहुल गांधी भी सपकपा गये.

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दरअसल राहुल गांधी दिल्ली में राहुल गांधी पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के वार्षिक दिवस समारोह में पहुंचे थे. वहां बॉक्सर विजेन्दर सिंह भी वहां मौजूद थे. कार्यक्रम के बीच में विजेन्दर सिंह ने राहुल गांधी से पूछा कि “आप पहले शादी करेंगे या पहले पीएम बनेंग”? इस सवाल को सुनकर वहां मौजूद लोग खिलखिला उठे और राहुल गांधी सकपका गये लेकिन सभल कर फिर राहुल गांधी ने इस पर जवाब दिया.

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दरअसल विजेन्दर सिंह के इस सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि ‘मैं किस्मत में यकीन रखता हूं, जब होगी तब होगी’. इसके अलावा विजेन्दर ने राहुल गांधी से सवाल किया कि पीएम बनने के बाद वो स्पोर्ट के लिए क्या करेंगे?  और राजनेता खेल पर कम क्यों ध्यान देते हैं? इस सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि स्पोर्ट के लिए उनकी जिन्दगी में अहम जगह है. उन्होंने कहा कि मैं एक्सरसाइज करता हूं, स्विमिंग करता हूं, साइकिलिंग करता हूं और दौड़ता हूं’, मगर सार्वजनिक तौर पर शेयर नहीं करता’.

आपको बता दें कि देश के दो स्टार हैं जिनकी शादी को लेकर लोग अक्सर सवाल पूछते रहते हैं. एक तो राजनीतिक घराने से ताल्लुख रखने वाले राहुल गांधी और दुसरे अभिनेता सलमान खान. इन दोनों की शादी की चर्चाएँ अक्सर सुर्ख़ियों में रहती हैं.

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कश्मीरी पंडित की मौत के बाद आसपास के मुस्लिमों ने देखिये क्या किया !

हिंदुस्तान का अभिन्न अंग कश्मीर, और वहां से निकाले गये कश्मीरी पंडित इस देश में हमेशा अलग नजरों से देखे जाते हैं. जहां कश्मीर में शांति बहाली के लिए मोदी सरकार हरसंभव प्रयत्न कर रही है वहीं कश्मीर से विस्थापित कश्मीरी पंडितों की वापसी का भी मुद्दा बेहद अहम है. ऐसा नही है कि कश्मीर में रहने वाला हर मुस्लिम हिन्दुओं की जान का प्यासा है और फिर उनके पुनर्वास के खिलाफ है. कई मुस्लिम ऐसे भी हैं जिन्होंने समय-समय पर कुछ ऐसी मिसाल पेश की है जिससे लगता है कि घाटी में अभी इंसानियत जिंदा है.

शरणार्थी कैम्प में कश्मीरी पंडित

अनंतनाग की घाटी से हम एक ऐसी खबर लाये हैं जो हर किसी के दिल को छू जाएगी. हर वो इंसान जो कश्मीरी पंडितों को वापस कश्मीर में देखना चाहता है, उसके लिए ये खबर एक अच्छा उदाहरण है. बता दें कि आतंकियों की धमकियों से 1990 में कश्मीर में आये भूचाल के बाद कई कश्मीरी पंडित अपना घर छोड़ चुके थे, उनमें से त्रिलोकी नाथ शर्मा भी एक थे. पिछले दो साल से लकवे की बीमारी जूझ रहे त्रिलोकी नाथ शर्मा (75 वर्ष) की मृत्यु 27 अक्टूबर को हो गयी. शर्मा, घाटी में वापस लौटने वालों में से एक थे. इनके बारे में बताया जा रहा है कि इलाके में एक शिक्षक के रूप में पहचान बना चुके थे. जिस क्षेत्र में त्रिलोकी नाथ शर्मा रहते थे वो मुस्लिम बाहुल्य था लेकिन इनकी मृत्यु के बाद इनके आसपास के मुस्लिमों ने जो किया वो खुद में एक मिसाल है.

अंतिम संस्कार में शामिल मुस्लिम समुदाय के लोग

जनसत्ता की खबर के अनुसार अनंतनाग का वानपोह गांव उस वक्त इंसानियत की मिसाल बन गया जब एक कश्मीरी पंडित के अंतिम संस्कार में कई मुस्लिमों ने मदद की. त्रिलोकी नाथ किसी समय यहां से विस्थापित हो चुके थे लेकिन जब वो कश्मीर वापस लौटे तो उन्हें वहां के मुस्लिमों ने अपने दिल में जगह दी. इतना ही नही वो शिक्षक थे और हर कोई उनका सम्मान करता था. पंडित त्रिलोकी अपनी पत्नी शारिका देवी, दो बेटे (राकेश और बंतू) और बेटी बिंती के साथ रहते थे. ये मसला इसलिए भी खास है क्योंकि कश्मीर में नापाक इरादे रखने वालों ने जिस तरीके के हालात बना रखे हैं, उसको देखते हुए ये राहत की खबर है. अलग-अलग धर्मों से होने के बाद भी जैसी सौहार्दता देखने को मिली, वो काबिल-ए-तारीफ है.

अंतिम संस्कार में शामिल लोग

बता दें कि त्रिलोकी नाथ शर्मा की मृत्यु के बाद मुस्लिम समुदाय ने हिंदू अनुष्ठानों के अनुसार मृतक शर्मा का अंतिम संस्कार कराने में काफी मदद की. इस मौके पर यहां के विधायक अब्दुल माजिद लर्मी और राज्य के पूर्व मंत्री अब्दुल गफ्फार सोफी भी मौजूद थे. इस घटना के बाद वहां के स्थानीय लोगों ने कहा कि ‘जो घाटी में तनाव फैलाना चाहते हैं उनके लिए ये सन्देश है कि हम सभी एकसाथ मिलकर रहते हैं.’

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घाटी के हालात ठीक करने के लिए मोदी सरकार ने भी अपने रुख में बदलाव किया है और बातचीत की शुरुआत के लिए आईबी के पूर्व डायरेक्टर दिनेश्वर शर्मा को प्रमुख बनाया है. हालाँकि देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह पहले भी कह चुके हैं कि “जम्मू-कश्मीर में निरंतर वार्ता प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए, कश्मीर के युवाओं की जो भी वैध अकांक्षाएं हैं उनको हल करने का पूरा प्रयास रहेगा. जो भी करेंगे साफ इरादे से करेंगे.”

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कानपुर पहुंचे खिलाड़ियों का कुछ इस तरह हुआ स्वागत कि विरोधियों की उड़ गयी नीद!

रविवार को कानपुर में भारत और न्यूजीलैंड के बीच एक दिवसीय मैच खेला जाना है. ऐसे में दोनों टीम कानपुर पहुँच चुकी हैं. कानपुर पहुंची दोनों टीमों को जबरदस्त स्वागत किया गया. उनके लिए होटल में कई प्रकार के देशी खाने भी तैयार किये जायेंगे लेकिन कानपुर पहुंची दोनों टीम का जिस तरह स्वागत किया गया है वो इस समय खूब वायरल हो रहा है. दरअसल होटल ने अपने पारंपरिक तरीके से खिलाड़ियों का स्वागत किया लेकिन यह स्वागत समारोह में खिलाड़ियों को पहनाएं गये शॉल की वजह से वायरल हो रहा है.

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आपको बता दें कि खिलाड़ियों का स्वागत भगवा रंग के शॉल को पहना कर किया गया. वायरल हो रहीं ख़बरों के अनुसार होटल द्वारा खिलाड़ियों को दिए गये शॉल पर योगी लिखा हुआ था. आपको बता दें कि इस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं और वो भगवा रंग के ही कपड़े पहनते हैं. जिसकी वजह से यह खूब वायरल हो रहा है.

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मीडिया रिपोर्ट की माने तो जिस होटल में खिलाड़ी रुके हुए हैं उस होटल को दीयों से सजा दिया गया हैं. खबर हैं कि होटल में खिलाड़ियों के लिए चाट और कुल्हड़ चाय की भी व्यवस्था की गयी है. इस सबके साथ ही खिलाड़ियों के लिए बनारसी पान की भी व्यवस्था की गयी है.

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होटल द्वारा खिलाडियों का जिस तरह स्वागत किया गया है उससे कई लोगों को यह बात हजम नही होगी. ओवैसी और आजम खान जैसे लोगों को खिलाड़ियों का यह स्वागत तो बिलकुल रास नही आएगा. हालाँकि अभी तक इन सबकी इस खबर पर कोई प्रतिक्रया सामने नहीं आई है.

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ताजमहल का वो दरवाजा जिसे खोलने से सरकार भी डरती हैं, सोशल मीडिया पर हो रहा है वायरल

विश्व का सातों अजूबों में से एक आगरा में स्थित ताजमहल के कई ऐसे रहस्य है जिससे अधिकतर लोग अंजान हैं. ताजमहल को लेकर कई सारे विवाद भी जुड़े हुए हैं. ऐसे ही एक रहस्य इस समय सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. जिसे देखने के बाद आपके मन में भी ताजमहल को लेकर सवाल जरुर उठेंगे. बताया जा रहा है कि ताजमहल के अन्दर एक ऐसा दरवाजा है जिसे खोलने से सरकार भी डरती हैं. अब इस बात में कितनी सच्चाई है ये तो हम नही बता सकते हैं?

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वीडियो में यह बताया गया है कि ताजमहल का निर्माण साल 1631 में शुरू करवाया गया था. ताजमहल का अजूबा तो देखने लायक है लेकिन ताजमहल पर हुए शोध ने तो सबको हैरान कर दिया है. शोधकर्ताओं ने ताजमहल को लेकर कई दावे किये हैं.  जिसमें एक दावा यह भी है कि ताजमहल जितना ऊपर है उतना ही नीचे हैं. उनके अनुसार ताजमहल के नीचे लगभग 1000 कमरे हैं जिनमें बड़ा खजाना भरा हो सकता है.

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वीडियो में दावा किया गया है कि जिस समय ताजमहल बनवाया गया था उस समय जितने भी किले बनते थे उसमें बाहर निकलने का गुप्त रास्ता होता है. कहा जाता हैं कि इस रास्ते को बंद करवा दिया गया था. जिसे आज तक खोला नही गया. ताजमहल के नीचे मौजूद कमरे को एक बार सरकार ने खोलने की कोशिश की थी लेकिन एक कमरे का दरवाजा खोलने के बाद उसे दुबारा बंद कर दिया गया था.

देखिये वायरल हो रहा वीडियो 

शोधकर्ताओं का मानना है कि ताजमहल के निर्माण के बाद नीचे मौजूद कमरों को बंद किया गया है. ताजमहल से एक और विवाद जुड़ा हुआ है जिसके अनुसार ताजमहल की जगह एक शिव मंदिर मौजूद था जिसे तोड़कर ताजमहल को बनवाया गया हैं.

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