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June 16, 2019
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देखिये जब राम रहीम की माँ उससे मिलने जेल गयी तो राम रहीम ने उसे देखते ही क्या किया…

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25 अगस्त को राम रहीम को दोषी करार दिया गया तो उसके समर्थकों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया था, जिसमें 38 लोगों की जान चली गयी. दोषी करार दिए जानें के बाद बाबा और उसके समर्थक 28 अगस्त का इंतजार कर रहे थे कि आखिर उसे सजा कितने साल की मिलती है. आखिर में वो समय भी आ गया और सीबीआई की अदालत ने उसे 28 अगस्त को 20 साल की कठोरतम कारावास की सजा सुना दी.

बाबा को सजा होने के बाद से ही आये दिन बाबा राम रहीम को लेकर कोई न कोई नया खुलासा होता ही रहता है. कोई बाबा की संपत्ति को लेकर खुलासा करता है, कोई उनके परिवार को लेकर तो कोई उनके महिलाओं के संग संबंधों को लेकर. लेकिन आज जो बात सामने आई है वो बेहद ही चौकाने वाली है कि राम से अब तक उसके परिवार का कोई भी सदस्य उससे मिलने तक नहीं गया. लेकिन आज जब राम रहीम की माँ राम रहीम से मिलने जेल गयी तो देखिये उसने क्या किया.

आपको बता दें कि गुरुवार 14 अगस्त को जब राम रहीम की माँ नसीब कौर राम रहीम से मिलने के लिए रोहतक जेल में पहुंची तो रहीम रहीम अपनी माँ को देखते ही रोने लगा था. बताया जा रहा है कि राम रहीम की माँ गुरुवार को करीब 3 बजे अपने बेटे से मिलने गयी थीं और ये मुलाकात तकरीबन 1 घंटे तक हुई होगी क्योंकि 4 बजे नसीब कौर जेल से बाहर निकल आई थीं. 

सूत्रों के अनुसार माँ और बेटे की इस मुलाक़ात के दौरान लोगों ने देखा कि माँ और बेटे दोनों की आँखों में आंसू नज़र आ रहे थे और राम रहीम की माँ ने उसे धैर्य रखने की सलाह दी थी. जिसके बाद देखा गया कि राम रहीम के चेहरे पर अलग ही सुकून सा नजर आ रहा था.

नेपाल बॉर्डर से मिली हनीप्रीत की कार ! लेकिन चौंक गए सब जब कार से निकला कांग्रेस…

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पिछले कुछ दोनों से मीडिया में हाईलाइट रहने वाले डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम के बाद अब उनकी गोद ली गई बेटी भी काफी सुर्ख़ियों में आ गई है. राम रहीम की गोद ली गई बेटी हनीप्रीत अपनी कार को लेकर चर्चा में आ गई हैं. हनीप्रीत की कार का कनेक्शन कांग्रेस पार्टी के एक नेता से निकला है. हनीप्रीत की जो कार नेपाल के बॉर्डर से मिली है. उसी को लेकर जानकारी मिली है कि यह कार कांग्रेस के एक नेता की है.

नेताप बॉर्डर से मिली स्कोडा कार मोहिंदर सिंह के.पी.के नाम पर है. तहकीकात में पता चला है कि उसका पता भी मिठ्ठापुर रोड, मॉडल टाउन है. इसी के साथ डी.टी.ओ. ऑफिस से भी जो रिकोर्ड मिले हैं उनमें में के.पी. के नाम ही है.  इसी बात को लेकर लोगों में चर्चा होने लगी कि लगता है कि के.पी. का डेरे से कुछ ना कुछ कनेक्शन जरूर है, उसने अपनी कार हनीप्रीत को दे दी हो. आपको बता दें कि मोहिंदर सिंह के.पी.पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष और कांग्रेस सरकार में खुद ट्रांसपोर्ट मंत्री रह चुके हैं.

जब मोहिंदर सिंह के.पी. से इस मामले को लेकर बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि 2008 में स्कोडा कार खरीदी थी. जिसके बाद 2011 में उन्होंने यह कार लुधियाना के जसविंदर सिंह को बेच दी थी. इस कार का नंबर 0001 वीआईपी होने की वजह से अपने पास रख लिया था. उसके बाद उन्होंने नया नंबर लेकर ये कार जसविंदर के नाम कर दी थी. जसविंदर ने बाद में यह कार यूपी के दविंद्र सिंह को बेच दी थी.

दविंद्र सिंह इस कार को नेपाल लेकर जा रहा था. बॉर्डर पर वकार खराब होने के बाद वह इस कार को वहीँ खड़ा करके नेपाल चला गया था. के.पी.ने बताया है कि उनकी दविंद्र से बात हो गई है. मोहिंदर सिंह के.पी. का कहना है कि उनका डेरे और कार से कुछ लेना देना नहीं है.

किन्नर ने जब अपने दिल की बात एक कलेक्टर को कही तो देखिये उसके साथ कलेक्टर ने क्या किया !

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जब कभी किसी के परिवार में कोई खुशी का अवसर होता है, तो हम देखते हैं कि किन्नर नाम के कुछ लोग उस अवसर में ज़रूर मौजूद मिलते है. वे लोग आपके समारोह में शिरकत करते हैं और कुछ बधाइयाँ गाकर, आशीर्वाद देते हैं और आपसे कुछ पैसे लेकर विदा हो जाते हैं. जिसके बाद हम सभी अपने-अपने कामों में व्यस्त हो जाते हैं. हम लोग इनका आशीर्वाद तो ले लेते हैं लेकिन कभी भी यह जानने की कोशिश नहीं करते हैं कि ये किन्नर आखिरकार हैं कौन, कहाँ से आये हैं और इनकी समस्याएँ क्या हैं जिसकी वजह से इन्हें जीवन-यापन करके लोगों के पास जाकर यूँ वसूली करनी पड़ती है. कभी भी कोई यह नहीं पूछता कि उनके भी कई अरमान होंगे जिसे वे लोग पूरा करना चाहते होंगे लेकिन कुछ लोगों की वजह से नहीं कर पा रहे होंगे.

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आज हम आपको एक ऐसे ही किन्नर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसनें अपनी आपबीती जिला कलेक्टर को बताई है. इस किन्नर का नाम सुनीता है. यह किन्नर बाबा राम रहीम के डेरे में रहती थी. जब से बाबा राम रहीम जेल गया है तब से जितने भी लोग उसके द्वारा प्रताड़ित किये जा रहे थे वे लोग सामने निकलकर आ रहे हैं कि उनके साथ डेरे में क्या-क्या हुआ है.

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बता दें कि सुनीता BA पास है, तो पढ़ी लिखी होनें के बावजूद वो अपने मन की नहीं कर पा रही है क्योंकि डेरे में रहकर उसके पास अभिव्यक्ति की आजादी नहीं थी लेकिन इस बार सुनीता ने कदम बढ़ाते हुए कलेक्टर निशांत वरवड़े के सामने अपनी बात रखी उसने कहा कि मैं पढ़ी लिखी हूं और लोगों को धमकाकर जबरन उनसे वसूली करना मुझे पसंद नहीं. मैं अपना खुद का कुछ काम करना चाहती हूं. लेकिन वो लोग मुझे मेरी जिंदगी जीने नहीं दे रहे हैं. इसलिए मै आपसे मदद मांगने आई हूं.

आपको बता दें कि यह मामला तब का है जब कलेक्टर निशांत वरवड़े जनसुनवाई में लोगों की समस्याएं सुन रहे थे इसी दौरान  सुनीता भी अपनी फरियाद लेकर वहां पहुँच गयीं. सुनीता की फ़रियाद सुनकर जनसुनवाई में मौजूद लोग सुनीता को देखते ही रह गए.  कलेक्टर साहब से सुनीता कहती हैं कि सर मै किन्नरों के साथ नहीं रहना चाहती हूं बल्कि मै पढ़ी लिखी हूँ तो नौकरी करना चाहती हूं इसलिए आप मेरी मदद करें.

सुनीता के मुह से ये बात सुनते ही कलेक्टर निशांत ने कहा कि नौकरी की जगह मैं तुम्हारा खुद का काम करने में मदद कर सकता हूं, जिसके लिए मै तुम्हे लोन दिलवा देता हूं. तुम क्या काम कर सकती हो ये बता दो ? सुनीता ने कहा कि मैंने सिलाई कढ़ाई भी सीखी हुई है इसलिए अगर आप इस काम में मेरी मदद करोगे तो मै कर लुंगी. लेकिन इस मदद के अलावा भी आपको मेरी एक मदद करनी होगी.

सुनीता ने उदास मन से कहा कि सर मेरे पिता पुलिस में हैं फिर भी मुझे डेरे में रहने वाले किन्नरों से बहुत डर लगता है. वे लोग मुझे डेरा छोड़ने नहीं देते उनका कहना है कि यदि जीना है तो हमारे साथ ही रहना होगा, नहीं तो तुम्हें रहने का कोई हक नहीं. सुनीता आगे बोलती हैं कि सर मै तो क्या बल्कि डेरे में रहने वाले कसी भी किन्नर के लिया डेरा छोड़ना आसान बात नहीं है. वहां के लोग जैसा भी हमें बोलते हैं हम वो ही करते हैं.

सुनीता की दर्द भरी दास्ताँ सुनकर कलेक्टर निशांत ने  उससे कहा कि अब अगर कोई भी तुम्हे परेशान या धमकी देगा तो हम उसे नहीं छोड़ेंगे. इसके साथ ही कलेक्टर निशांत ने तत्काल एडीएम को पुलिस के साथ मिलकर इस मुद्दे पर किन्नरों के सभी डेरा संचालकों के साथ बैठक के निर्देश दिए हैं. निशांत ने कहा कि किन्नरों के गुरु के अपने शिष्यों के साथ जो भी रिश्ते हैं हम उसमें कोई दखल नहीं देंगे, लेकिन यदि कोई भी किसी को डराने, धमकाने या मारने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.

राम रहीम को मिला एक और तगड़ा झटका जिसकी किसी को नहीं थी उम्मीद

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आये दिन बाबा राम रहीम को लेकर कोई न कोई नया खुलासा होता ही रहता है. कोई बाबा की संपत्ति को लेकर खुलासा करता है, कोई उनके परिवार को लेकर तो कोई उनके महिलाओं के संग संबंधों को लेकर. लेकिन आज जो खुलासा हुआ है उसे जानकर आप भी दंग रह जायेंगे. इस बार बाबा को मिली उस सुविधा का खुलासा हुआ है जो अब तक किसी को नहीं मालूम थी कि आखिर बाबा को वो सुविधा सरकार की ओर से मिली कब.

यहाँ भी पढ़ें-बाबा राम रहीम को जेल पहुँचाने में ख़ुद उनकी गोद ली बेटी का है बड़ा हाथ?

जी हाँ बाबा को गण्यमान्य लोगों की सूची  में रखा गया था जिसके चलते बाबा हवाई अड्डों पर वीआईपी लाउन्ज का इस्तेमाल  करते थे. आपको बता दें कि हवाई अड्डों पर ‘रिजर्व लाउन्ज’ के इस्तेमाल की अनुमति देना केवल मंत्रालय के अंतर्गत आता है, लेकिन फिर भी इस बात का पता नहीं लगाया जा सका है कि राम रहीम को यह सुविधा दी कब गयी.

खैर बाबा को मिल रही इस सुविधा को हटाने के लिए सरकार ने एक अहम फैसला लिया है और भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा है कि बाबा राम रहीम का नाम उन गण्यमान्य लोगों की सूची से हटाया जाए जो लोग हवाई अड्डों पर वीआईपी लाउन्ज का इस्तेमाल करते हैं.

आपको बता दें कि यह पत्र नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एक सितंबर को भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के अध्यक्ष को  लिखा था और जिसमें उन्होंने कहा था कि बाबा को हवाई अड्डों पर मिल रही वीआईपी सुविधाओं को तत्काल वापस लिया जाए. वहीँ एएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि उसने क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशकों के साथ-साथ हवाई अड्डा निदेशकों को भी निर्देश दिया है कि वे आदेश का पालन करें.

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आपको भी नहीं होगा यकीन कि बाबा अय्याश ही नहीं बल्कि ऐसा भी था

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आये दिन बाबा राम रहीम को लेकर कोई न कोई नया खुलासा होता ही रहता है. कोई बाबा की संपत्ति को लेकर खुलासा करता है, कोई उनके परिवार को लेकर तो कोई उनके महिलाओं के संग संबंधों को लेकर. लेकिन आज जो खुलासा हुआ है उसे जानकर आप भी दंग रह जायेंगे. इस बार खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि बाबा के ड्राईवर और डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख ने ही किया है.

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यहाँ भी पढ़ें- बाबा राम रहीम को जेल पहुँचाने में ख़ुद उनकी गोद ली बेटी का है बड़ा हाथ? अब जल्द ही ये भी जाएँगी जेल.

बाबा के ड्राईवर और डेरे के प्रमुख का नाम विजय है. विजय खुद डेरे में 1992 से रह रहा था और वहां ड्राइवर के पद पर कर्यायत था. लेकिन जब से बाबा का कारनामा सामने आया है तभी से विजय ने अपने परिवार सहित डेरा छोड़ दिया है और बरेली आकर बस गए हैं. लेकिन विजय ने यहाँ आकर मीडिया से बात चीत करते हुए डेरे को लेकर और बाबा को लेकर कई नए खुलासे किये हैं.

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विजय का कहना था कि डेरा लोगों के रहने का आश्रय था जहाँ लोग न जानें कितने सालों से रह रहे थे.
अगर बाबा की बात करें तो बाबा के काम करने का तरीका बिलकुल ही अलग था आम तौर पर देखा गया है कि कई बाबा अपने भक्तों से ही पैसा लूटते हैं लेकिन बाबा राम रहीम अपने भक्तों से एक भी पैसा नहीं लेता था. बाबा ने कभी भी डेरे में  चढ़ावा नहीं लिया…शायद यह एक अहम वजह रही होगी जिससे लोग उससे जुड़ते चले गए.

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बाबा ने तो सस्ते दामों में उबड़ खाबड़ और बंजर जमीन खरीदी और वहीँ अपने भक्तों और सेवादारों से कार सेवा करवाई जब ज़मीन बंजर से उपजाऊ बनी तो उगी हुई फसल को बाबा प्रसाद के तौर पर बेचता था. डेरे में बच्चों के लिए स्कूल थे, मरीजों के लिए अस्पताल थे और तो और यहाँ लोग आराम से अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करते थे.

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इतना ही नहीं विजय ने बताया कि डेरे में अगर कसी भी चेले की मृत्यु हो जाती थी तो उसे कहीं और नहीं बल्कि डेरे में ही दफन किया जाता था और उसकी कब्र के ऊपर एक पेड़ लगाया जाता था ताकि उस सदस्य को
सभी डेरे के लोग और उसके परिवार वाले हमेशा उसे अपने पास पायें और याद रखे.

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विजय कहते हैं कि ऐसा नहीं है की मै बाबा की तारीफ कर रहा हूँ बल्कि मेरा तो कहना है कि राम रहीम जैसे जितने भी बाबा हैं उनकी असली जगह समाज के बीच रहना नहीं बल्कि जेल ही है. जेल से बेहतर जगह इन लोगों के लिए तो कोई और जगह हो ही नहीं सकती. डेरे से वापस आने के बाद विजय ने अपनी ज़िन्दगी की नयी शुरुआत कर ली है, उसने बरेली लौटते ही ट्रांसपोर्टर की दुकान में ट्रक ड्राइवर का काम पकड़ लिया है.

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